Here is a lovely poem by Gulzar ji, which is also immortalized as a beautiful song in movie “Andhi”. This movie has other famous songs as well namely “Tum aa gaye ho…” and “Tere bina jindgi se…” , probably thats why I never happened to listen this song before. Listen it here and you’ll njoy this poem even more !!
इस मोड़ से जाते हैं
कुछ सुस्त क़दम रस्ते
कुछ तेज़ क़दम राहेंपत्थर की हवेली को
शीशे के घरौंदों में
तिनको के नशेमन तक
इस मोड़ से जाते हैं !आंधी की तरह उड़ कर
इक राह गुज़रती है
शर्माती हुई कोई
क़दमों से उतरती हैइन रेशमी राहों में
इक राह तो वो होगी
तुम तक जो पहुंचती है
इस मोड़ से जाती है !इक दूर से आती है
पास आके पलटती है
इक राह अकेली सी
रुकती है न चलती हैये सोच के बैठा हूँ
इक राह तो वो होगी
तुम तक जो पहुंचती है
इस मोड़ से जाती है !इस मोड़ से जाते हैं
कुछ सुस्त क़दम रस्ते
कुछ तेज़ क़दम राहेंपत्थर की हवेली को
शीशे के घरौंदों में
तिनको के नशेमन तक
इस मोड़ से जाते हैं !